कोरबा: ऐतिहासिक एवं पौराणिक पहचान वाले लक्ष्मण नाला पर मंडराया संकट, निर्माण कार्य रोकने कलेक्टर से गुहार

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निजी कंपनी की सुविधा के लिए सड़क निर्माण से प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचने की आशंका, ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने की निष्पक्ष जांच की मांग

कुसमुंडा/कोरबा। जिले के ग्राम कुचेना स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक लोकमान्यताओं से जुड़े लक्ष्मण नाला के अस्तित्व को लेकर अब चिंता बढ़ने लगी है। क्षेत्र में जारी सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों से नाले की प्राकृतिक संरचना, जल प्रवाह और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। इस मामले को लेकर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए निर्माण कार्यों पर जांच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कलेक्टर, जिला कोरबा को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लक्ष्मण नाला के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ी है स्थानीय मान्यता

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समिति के अनुसार ग्राम कुचेना का लक्ष्मण नाला स्थानीय ग्रामीणों की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ग्रामीणों और बुजुर्गों के बीच प्रचलित लोकमान्यता के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के वनवास काल से माना जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां एक बड़ी पत्थर की आकृति भी मौजूद है, जिसे लक्ष्मण जी द्वारा ईंट काटे जाने की मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि यह स्थल केवल प्राकृतिक जल निकासी का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोकस्मृति और सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा माना जाता है।

निजी कंपनी के लिए सड़क निर्माण, भूमि खरीदी और स्वीकृति पर उठे सवाल

समिति अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में किसानों की निजी भूमि खरीदकर कोयला डिस्पैच के लिए स्टॉक एवं सड़क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्यों से लक्ष्मण नाला की प्राकृतिक संरचना और जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी निजी कंपनी की व्यावसायिक सुविधा के लिए यह निर्माण कराया जा रहा है, तो इसकी आवश्यकता, प्रशासनिक स्वीकृति, वैधानिक अनुमति और स्थानीय धरोहर पर पड़ने वाले प्रभाव की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही किसानों से खरीदी गई भूमि, उसके मूल्य और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

विकास के विरोध में नहीं समिति, लेकिन धरोहर से समझौता मंजूर नहीं

समिति ने स्पष्ट किया है कि वह विकास कार्यों के विरोध में नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर किसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के अस्तित्व को खतरे में डालना उचित नहीं है। समिति का कहना है कि लक्ष्मण नाला क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और ग्रामीणों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यदि एक बार ऐसी धरोहर नष्ट हो गई तो उसकी भरपाई करना संभव नहीं होगा।

कलेक्टर से की गईं सात प्रमुख मांगें

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने जिला प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

  1. लक्ष्मण नाला के आसपास जारी निर्माण कार्यों पर जांच पूरी होने तक तत्काल रोक लगाई जाए।
  2. राजस्व विभाग, संबंधित ग्राम पंचायत एवं अन्य सक्षम विभागों की संयुक्त टीम गठित कर स्थल का निरीक्षण और सीमांकन कराया जाए।
  3. नाले की प्राकृतिक संरचना, जल प्रवाह एवं स्थानीय ऐतिहासिक-पौराणिक मान्यताओं का दस्तावेजीकरण कराया जाए।
  4. किसानों की भूमि खरीदी, भूमि के मूल्य, सड़क निर्माण की आवश्यकता और निजी कंपनी को होने वाले संभावित लाभ की निष्पक्ष जांच हो।
  5. सड़क निर्माण की स्वीकृति, नक्शा, वैधानिक अनुमति एवं अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए।
  6. लक्ष्मण नाला के संरक्षण के लिए ठोस योजना बनाई जाए तथा जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सड़क मार्ग पर विचार किया जाए।
  7. जांच और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ग्रामवासियों एवं समिति को लिखित रूप में दी जाए।

प्रशासन के हस्तक्षेप का इंतजार, धरोहर बचाने की उठी मांग

समिति अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों के चलते किसी प्रकार की अपूरणीय क्षति होने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।

अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों और समिति की मांग है कि किसी भी निर्माण को आगे बढ़ाने से पहले लक्ष्मण नाला की वास्तविक स्थिति, प्राकृतिक स्वरूप और सांस्कृतिक महत्व की जांच कराई जाए, ताकि विकास कार्यों के साथ स्थानीय विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

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