SECL गेवरा और नराईबोध के ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता संपन्न, बसाहट, रोजगार और मुआवजे पर बनी सहमति

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दिसंबर 2026 से शुरू हो सकती है प्लॉट आवंटन, मकान ध्वस्तीकरण और भुगतान की प्रक्रिया

गेवरा/कोरबा। एसईसीएल गेवरा क्षेत्र अंतर्गत प्रभावित ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों की बसाहट, रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी मांगों को लेकर 23 अक्टूबर 2026 को एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के सभागार में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीणों, प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के बीच विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी और लंबित मामलों के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बसाहट और पुनर्वास के मुद्दे पर हुई चर्चा

बैठक में ग्रामीणों ने इश्तहार प्रकाशन के अनुसार बसाहट के लिए 74 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर एसईसीएल प्रबंधन ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से भूमि का समतलीकरण किए जाने के बाद संबंधित स्थल पर लगभग 300 से 330 प्लॉट तैयार किए जा सकेंगे। प्रबंधन के अनुसार इन प्लॉटों का आवंटन केवल ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों के लिए किया जाएगा।

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दिसंबर से शुरू हो सकती है आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया

पुनर्वास प्रक्रिया के संबंध में प्रबंधन ने जानकारी दी कि लगभग 450 लोगों ने बसाहट के बदले एकमुश्त राशि लेने के लिए सहमति दी है। वर्तमान में पात्र और अपात्र हितग्राहियों की सूची तैयार की जा रही है। बिलासपुर मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद दिसंबर 2026 से प्लॉट आवंटन, मकानों के ध्वस्तीकरण और भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है।

मुआवजा भुगतान और तकनीकी मामलों पर भी चर्चा

बैठक में भूमि और मकान के मुआवजे से जुड़े मामलों पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि भू-स्वामियों और मकान स्वामियों के बीच सहमति नहीं बनने की स्थिति में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के नियमों के तहत भुगतान की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, भू-स्वामी अथवा उनके विधिक वारिसों की सहमति के बिना भुगतान किए जाने पर आपत्ति की स्थिति में मुख्यालय से निर्धारित समय-सीमा के भीतर दिशा-निर्देश प्राप्त कर उचित कार्रवाई करने की बात कही गई।

इसके अलावा ग्राम नराईबोध की घटते क्रम की सूची में निर्धारित 0.51 एकड़ के कट-ऑफ पॉइंट से संबंधित संशोधन का मामला भी उठाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में प्रक्रिया जारी है और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाएगी।

ग्रामीणों ने कहा—मूलभूत सुविधाओं और विस्थापन की समस्याओं का हो स्थायी समाधान

बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे खदान विस्तार के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि कंपनी द्वारा विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का उचित समाधान किया जाए। ग्रामीणों ने पानी, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं, बसाहट और मुआवजे जैसे मुद्दों का त्वरित एवं स्थायी निराकरण करने पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि समस्याओं का समाधान तय समय-सीमा के भीतर किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को अपनी मांगों के लिए बार-बार आंदोलन करने के लिए बाध्य न होना पड़े।

जनप्रतिनिधि, प्रशासन और एसईसीएल अधिकारी रहे मौजूद

त्रिपक्षीय वार्ता में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, कटघोरा एसडीएम विपिन दुबे, दीपका तहसीलदार राजभानु, एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक अशोक कुमार, स्टाफ ऑफिसर (भू-राजस्व), कार्मिक प्रबंधक सुधा शिंडे, ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप सहित ग्राम नराईबोध की पार्षद अमिला पटेल, राकेश पटेल, रुद्र दास महंत, जगदीश पटेल, शशि साहू, ललित महिलांगे, रामायण लाल यादव, सहसराम, सुंदर साय, मकसुदन यादव, समारु दास, नवीन दास, संजय पाल, कृष्णा कुमार तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। अब ग्रामीणों की नजरें प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन द्वारा तय की गई प्रक्रियाओं पर हैं। विशेष रूप से दिसंबर 2026 से प्रस्तावित प्लॉट आवंटन, मुआवजा भुगतान और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई समय पर शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।

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