रायगढ़ में जमीन सीमांकन को लेकर विवाद, किसान ने निजी भूमि और शासकीय जमीन पर कब्जे की कोशिश का लगाया आरोप

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छातामुड़ा-बांजीपाली हल्का सीमा पर विवाद गहराया, संयुक्त सीमांकन और निर्माण कार्य पर लिखित रोक लगाने की मांग

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में छातामुड़ा-बांजीपाली राजस्व हल्का सीमा पर स्थित जमीन के सीमांकन को लेकर विवाद सामने आया है। पीड़ित फत्तेचंद पटेल (गोटिया) और कैलाश आचार्य ने तहसील न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के बावजूद विवादित भूमि पर बाउंड्रीवॉल निर्माण शुरू किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष ने इस मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच, संयुक्त सीमांकन और निर्माण कार्य पर लिखित स्थगन आदेश जारी करने की मांग की है।

न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी निर्माण शुरू करने का आरोप

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तहसील न्यायालय परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान फत्तेचंद पटेल ने बताया कि नितेश अग्रवाल की ओर से जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के संबंध में तहसीलदार न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद उन्हें और कैलाश आचार्य को नोटिस जारी किया गया।

पटेल का आरोप है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद विवादित भूमि पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया। उनका दावा है कि संबंधित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले निर्माण कर कब्जा स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि विवाद का विधिक निराकरण होने तक जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाए, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों।

सीमांकन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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फत्तेचंद पटेल ने पूर्व में किए गए सीमांकन पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सीमांकन के दौरान भारी बारिश, कीचड़, झाड़ियों और गड्ढों में पानी भरे होने के कारण जमीन की सटीक नपाई प्रभावित हुई थी।

उन्होंने बताया कि उस समय भी सीमांकन की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा न्यायालय में लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर शुष्क मौसम में दोनों पक्षों की उपस्थिति में दोबारा निष्पक्ष सीमांकन कराने की मांग की गई थी।

पीड़ित पक्ष ने संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।

दो राजस्व हल्कों की सीमा पर जमीन को लेकर विवाद

कैलाश आचार्य के अनुसार, विवादित भूमि छातामुड़ा और बांजीपाली के राजस्व हल्कों की सीमा पर स्थित है। उन्होंने सीमांकन के दौरान खसरा नंबर 155/2 के रकबे को दोनों क्षेत्रों में दर्शाए जाने पर सवाल उठाते हुए राजस्व अभिलेखों और वास्तविक स्थल की स्थिति का मिलान कराने की मांग की है।

आचार्य का आरोप है कि इस विवाद के कारण किसान की निजी भूमि के साथ-साथ नेशनल हाईवे से लगी शासकीय भूमि भी प्रभावित हो सकती है। उनके मुताबिक, खसरा नंबर 156 की भूमि शासकीय मद में दर्ज है और आशंका है कि विवादित सीमांकन के चलते इस जमीन का हिस्सा भी बाउंड्रीवॉल के भीतर शामिल हो सकता है।

पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से संबंधित खसरों के राजस्व अभिलेखों, नक्शों और वास्तविक कब्जे की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद निर्माण रुकने का दावा

पीड़ित पक्ष के अनुसार, विवादित स्थल पर निर्माण कार्य की शिकायत तहसीलदार से किए जाने के बाद मौके पर चल रहे बाउंड्रीवॉल निर्माण को रुकवा दिया गया। हालांकि, उनका कहना है कि केवल मौखिक रूप से काम रुकवाना पर्याप्त नहीं है।

फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य ने मांग की है कि न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक निर्माण कार्य पर लिखित स्थगन आदेश जारी किया जाए, ताकि रात के समय दोबारा निर्माण शुरू किए जाने की आशंका से बचा जा सके।

संयुक्त सीमांकन कराने की मांग

मामले के समाधान के लिए पीड़ित पक्ष ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि छातामुड़ा और बांजीपाली के संबंधित अधिकारियों, तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और हल्का पटवारियों की संयुक्त टीम गठित की जाए।

उनकी मांग है कि दोनों क्षेत्रों के राजस्व नक्शों, खसरा अभिलेखों और वास्तविक स्थल की स्थिति का मिलान करते हुए दोनों पक्षों की मौजूदगी में निष्पक्ष एवं पारदर्शी सीमांकन कराया जाए।

पीड़ितों का कहना है कि विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए और अंतिम निर्णय आने तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।

अब निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन सीमांकन संबंधी आपत्तियों की जांच कराता है या नहीं और निजी भूमि तथा शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाता है।

नोट: इस समाचार में कब्जे, सीमांकन में गड़बड़ी और शासकीय भूमि प्रभावित होने संबंधी बातें शिकायतकर्ता पक्ष के आरोपों एवं दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना शेष है।

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