RTI की प्रथम अपील पर बार-बार तारीख?

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शिकायतकर्ता रविंद्र तिवारी का आरोप—“सुनवाई टालने से सूचना के अधिकार का उद्देश्य प्रभावित”

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बिलासपुर। सूचना के अधिकार के तहत दायर प्रथम अपील की सुनवाई को लेकर बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल पर शिकायतकर्ता रविंद्र तिवारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। तिवारी का कहना है कि प्रथम अपील की सुनवाई के लिए बार-बार तारीख निर्धारित की जाती है, लेकिन निर्धारित समय पर सुनवाई आगे बढ़ा दी जाती है अथवा स्थगित कर दी जाती है। उनका आरोप है कि इस तरह मामले के निपटारे में अनावश्यक देरी हो रही है।

30 दिन में अपील के निस्तारण का प्रावधान

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(6) के अनुसार प्रथम अपील का निस्तारण सामान्यतः अपील प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम 45 दिन तक बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए देरी के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना आवश्यक है।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि प्रथम अपील की सुनवाई लगातार टाली जा रही है, तो क्या निर्धारित वैधानिक समयसीमा का पालन हो रहा है?

शिकायतकर्ता ने उठाई जवाबदेही की मांग

रविंद्र तिवारी का कहना है कि उन्होंने सूचना प्राप्त करने के अधिकार के तहत प्रथम अपील प्रस्तुत की है, लेकिन बार-बार तारीख मिलने के बावजूद मामले का अंतिम निराकरण नहीं हो पा रहा है। खुद तिथि तय करना और ठीक सुनवाई के निर्धारित समय पर अपीलार्थी के उपस्थित होने के बाद अपील की सुनवाई को निरस्त करने की घोषणा करते हुए कुर्सी छोड़ कर भाग खड़े होना सत्य के उजागर की संभावना से, हो रहे घबराहट को प्रदर्शित करता है ।
RTI अधिनियम की धारा 18(1)
प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक को दस्तावेज प्राप्त करने में अवरोध पैदा करने की नीयत से धारित पद कर्तव्य से विमुख होते हुए बार बार अपील की सुनवाई को टालने तारीख पे तारीख देने के कारण अपीलार्थी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनिम 2005 की धारा 18(1) के तहत सीधे मुख्य आयुक्त राज्य सूचना आयोग छत्तीसगढ़ के समक्ष शिकायत दर्ज कराने बाध्य होना पड़ रहा है। वहीं, अधिनियम की धारा 20 में कुछ परिस्थितियों में लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना देने में अनुचित रूप से विफल रहने, जानबूझकर गलत/अपूर्ण/भ्रामक सूचना देने या सूचना उपलब्ध कराने में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान है।

अब देखने वाली बात यह है कि प्रथम अपील का निस्तारण निर्धारित वैधानिक समयसीमा में होता है या सुनवाई की तारीखों का सिलसिला आगे भी जारी रखते हुए दस्तावेजों को छुपाने का क्रम जारी रहेगा !
प्रथम अपील को बार बार टाला जाना विभाग में भारी मात्रा में भ्रष्टाचार होने की संभवना को हकीकत में दर्शाता है ।

प्रथम अपीलीय अधिकारी जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी है के अधीनस्थ जिला कार्यालय एवं ब्लॉक कार्यालयों में बैठे अधिकारियों द्वारा किए गए वित्तीय घोटालों और भविष्य में होने वाली सजा से बचाने की नीयत से सुनवाई को टाला जा रहा है ।
प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा सुनवाई को टाला जाना जिले में संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों,जीवनदीप समितियों,आयुष्मान योजना प्रोत्साहन राशि वितरण में में वित्तीय भ्रष्टाचार की संभावना को सत्य में परिवर्तित होना सिद्ध करता है ।

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