अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ जांच की मांग, राज्यपाल समेत प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ जांच की मांग, राज्यपाल समेत प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने जनसंपर्क विभाग/संवाद कार्यालय में पदस्थ अपर संचालक संजीव तिवारी की पदस्थापना सहित विभिन्न मामलों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है। एसोसिएशन की ओर से इस संबंध में राज्यपाल, वित्त मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित संबंधित शासन स्तर के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया।

एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान महासचिव राहुल कुमार मिश्रा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में संजीव तिवारी की करीब पांच वर्षों की पदस्थापना, स्थानांतरण नीति-2025 के प्रावधानों और 3 अगस्त 2026 को जारी संबंधित शासन अधिसूचना/पत्र के संदर्भ में उनकी पदस्थापना की नियमसम्मत स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है।

पदस्थापना और स्थानांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग

ज्ञापन में छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति-2025, File No. RULE-3017/2/2025-GAD-6, दिनांक 5 जून 2025 का उल्लेख किया गया है। एसोसिएशन ने पिछले पांच वर्षों के दौरान संजीव तिवारी की पदस्थापना, स्थानांतरण, पदोन्नति, कार्य-विभाजन, अतिरिक्त प्रभार और किसी भी प्रकार की स्थानांतरण छूट से संबंधित आदेशों एवं अनुमोदनों की जांच की मांग की है।

विज्ञापन और टेंडर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

एसोसिएशन ने पिछले पांच वर्षों के दौरान जनसंपर्क विभाग/संवाद कार्यालय में हुए सरकारी विज्ञापन आवंटन और टेंडर प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।

ज्ञापन में विज्ञापन प्राप्त करने वाले समाचार पत्रों एवं मीडिया संस्थानों की पात्रता, पंजीयन, प्रसार संबंधी दस्तावेज, विज्ञापन दर, भुगतान, बिल, चयन समिति के निर्णय तथा संबंधित फाइल और नोटशीट की जांच की मांग की गई है।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि जांच में किसी अपात्र संस्था को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा लाभार्थियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग

ज्ञापन में पत्रकारों एवं समाचार संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट से संबंधित शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

एसोसिएशन ने बुलंद छत्तीसगढ़ समाचार पत्र के हॉकर प्रतिनिधि से संबंधित कथित मारपीट की घटना का उल्लेख करते हुए पुलिस रिपोर्ट, CCTV फुटेज, वीडियो, समाचार प्रकाशन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान की जांच कराने की मांग रखी है।

ज्ञापन में राखी थाना, नया रायपुर में दर्ज FIR-165/25 का भी उल्लेख किया गया है। एसोसिएशन ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच और जांच के निष्कर्ष से संबंधित पक्षों को अवगत कराने की मांग की है।

संपत्ति और आय के स्रोतों की जांच की मांग

शिकायत में संजीव तिवारी की पिछले पांच वर्षों की ज्ञात आय और संपत्ति का परीक्षण कराने की मांग भी की गई है। एसोसिएशन ने चल-अचल संपत्ति, बैंक एवं वित्तीय लेन-देन, निवेश तथा आय के ज्ञात स्रोतों की सक्षम वैधानिक जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

इसके अलावा खसरा क्रमांक 289/143 से संबंधित भूमि का मौके पर सीमांकन कराकर राजस्व अभिलेख और वास्तविक स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि यदि जांच में शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच पूरी होने तक संवेदनशील जिम्मेदारियों से हटाने की मांग

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच अवधि में संजीव तिवारी को विज्ञापन, टेंडर अथवा अन्य संवेदनशील वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों से अलग करने पर शासन से नियमानुसार विचार करने की मांग की है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अथवा किसी व्यक्ति की राजनीतिक छवि को प्रभावित करना नहीं है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य अधिकारियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच और शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित कराना है।

ये पदाधिकारी रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष सोनू रेलवानी, प्रदेश महासचिव परितोष शर्मा, संदीप शर्मा, प्रदेश प्रभारी शशिकांत देवांगन उर्फ सनसनी, कानूनी सलाहकार शिव शंकर, राहुल कुमार मिश्रा, खिलावन चक्रधारी, सरस बर्मन, संतोष यदु और जावेद खान सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश प्रधान महासचिव राहुल कुमार मिश्रा ने की।

एसोसिएशन ने शासन से मांग की है कि ज्ञापन में लगाए गए सभी आरोपों की दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच में आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत आवश्यक विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

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