उसलापुर वार्ड क्रमांक 3 के प्रधानमंत्री आवासों में बदहाली: रहवासी बोले—घर मिला, लेकिन जीना हुआ मुहाल

उसलापुर वार्ड क्रमांक 3 के प्रधानमंत्री आवासों में बदहाली: रहवासी बोले—घर मिला, लेकिन जीना हुआ मुहाल

बिलासपुर | उसलापुर वार्ड क्रमांक 3

बिलासपुर के उसलापुर वार्ड क्रमांक 3 स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों में रहने वाले गरीब परिवार इन दिनों नारकीय परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन की कथित लापरवाही और वर्षों से रखरखाव के अभाव ने करोड़ों रुपये की आवासीय योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्की छत और बेहतर जीवन देने का दावा किया जाता है, लेकिन उसलापुर के इन आवासों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें घर तो मिला, मगर साफ-सफाई, सीवरेज, पाइपलाइन और भवन रखरखाव की समस्याओं ने उनका जीवन मुश्किल कर दिया है।

सात साल से नहीं हुई बड़े चैंबर की सफाई?

रहवासियों के मुताबिक, आवास परिसर में बना बड़ा सीवरेज चैंबर, जिसमें विभिन्न मकानों का गंदा पानी मल एकत्र होता है, लंबे समय से साफ नहीं किया गया है। आरोप है कि चैंबर के भर जाने के कारण गंदा पानी और मलजल आसपास फैल रहा है तथा कई मकानों की दीवारों में सीलन और सीपेज की समस्या पैदा हो गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सेफ्टी पाइप सहित कई पाइपलाइन खराब या टूट चुकी हैं। इन समस्याओं की जानकारी नगर निगम को कई बार दिए जाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ।

छत से लेकर दीवारों तक पानी का रिसाव

रहवासियों के अनुसार, आवासों की छतों पर लगी सिलटैकश टुटा फटा हूआ वर्षों से खराब है। उनका आरोप है कि बारिश अथवा पानी के रिसाव के कारण ऊपरी मंजिलों के मकानों में पानी टपक रहा है। दीवारों में लगातार सीपेज के चलते उनकी हालत खराब होती जा रही है।

कुछ परिवारों का दावा है कि दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं और प्लास्टर झड़कर नीचे गिर रहा है। ऐसे में छोटे बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को लेकर रहवासी चिंतित हैं।

“सफाई के लिए भी मांगे जाते हैं पैसे”

रहवासियों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि जब नगर निगम की ओर से सफाई कर्मचारियों को भेजा जाता है, तो कथित तौर पर उनसे अतिरिक्त पैसे की मांग की जाती है।

गरीब और रोजी-मजदूरी कर परिवार चलाने वाले लोगों का कहना है कि यदि सरकारी आवास की सफाई और मूलभूत रखरखाव के लिए भी उनसे पैसे मांगे जाएंगे, तो वे इसका खर्च कैसे उठा पाएंगे?

हालांकि, पैसे मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नगर निगम प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

“जहां घर तोड़ा गया था, वहां बेहतर जीवन था”

रहवासियों का कहना है कि जिन स्थानों से उनके पुराने मकान हटाए गए, वहां वे अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से रह रहे थे। प्रधानमंत्री आवास मिलने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलेगा, लेकिन मौजूदा स्थिति ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं।

एक रहवासी ने कहा कि परिवार के छोटे बच्चों को गंदगी, सीलन और बदबू के बीच रहना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार ने घर दिया है तो उसे रहने योग्य बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने नगर निगम अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन और शिकायतें दी हैं। इसके बावजूद टूटी पाइपलाइन, सीवरेज चैंबर, सीपेज और भवनों की मरम्मत जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ये आरोप सही हैं, तो सात वर्षों से आवास परिसर की नियमित सफाई, सीवरेज व्यवस्था और भवनों के रखरखाव की निगरानी आखिर किसकी जिम्मेदारी थी?

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

रहवासियों द्वारा लगाए गए आरोपों को देखते हुए यह मामला केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रह जाता। यदि वास्तव में भवनों में दरारें, लगातार सीपेज, टूटे पाइप और कमजोर प्लास्टर की स्थिति है, तो यह सुरक्षा का गंभीर विषय बन सकता है।

नगर निगम को चाहिए कि मामले की तत्काल तकनीकी जांच कराए, भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा का परीक्षण कराए, सीवरेज और पाइपलाइन व्यवस्था दुरुस्त करे तथा दोष पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करे।

सवाल सीधा है—प्रधानमंत्री आवास गरीब परिवारों को सुरक्षित जीवन देने के लिए बनाए गए थे या उन्हें ऐसी परिस्थितियों में छोड़ देने के लिए?

उसलापुर वार्ड क्रमांक 3 के रहवासी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर कार्रवाई और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

नोट: इस खबर में लगाए गए भ्रष्टाचार, पैसे मांगने और निर्माण गुणवत्ता संबंधी आरोप स्थानीय रहवासियों के बयानों पर आधारित हैं। संबंधित नगर निगम अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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