पहली ही बारिश में बह गया 15 लाख का रपटा: पहले दी गई थी लिखित चेतावनी, अब निर्माण गुणवत्ता और प्रशासन पर उठे सवाल

पहली ही बारिश में बह गया 15 लाख का रपटा: पहले दी गई थी लिखित चेतावनी, अब निर्माण गुणवत्ता और प्रशासन पर उठे सवाल

भैयाथान/सूरजपुर। सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र में गोबरी नदी पर लगभग 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित रपटा पहली ही बारिश में बह जाने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पहले ही दी गई थी लिखित चेतावनी

जनपद पंचायत भैयाथान के सभापति (सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग) राजू कुमार गुप्ता ने दावा किया कि उन्होंने 7 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भैयाथान को लिखित आवेदन देकर गोबरी नदी पर बने रपटा की जर्जर स्थिति की जांच और तत्काल मरम्मत कराने की मांग की थी।

उनके अनुसार आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो बारिश के दौरान बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही तकनीकी जांच कराकर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी की गई थी।

शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लगातार बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर रपटा बह गया। हालांकि घटना के समय कोई व्यक्ति या वाहन वहां मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय कोई वाहन या राहगीर रपटा पार कर रहा होता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

सड़क का तीन बार भूमिपूजन, फिर भी अधूरा निर्माण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मार्ग की सड़क का तीन बार भूमिपूजन किया गया, लेकिन निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। उनका कहना है कि जिस रपटे को विकास की उपलब्धि बताकर प्रचारित किया गया था, वह पहली ही बारिश नहीं झेल सका।

युवाओं ने चंदा जुटाकर बनाई अस्थायी अप्रोच रोड

रपटा बहने के बाद गांव का संपर्क प्रभावित हो गया। ग्रामीणों के अनुसार स्थानीय युवाओं ने स्वयं चंदा एकत्र कर अस्थायी अप्रोच रोड तैयार की ताकि लोगों की आवाजाही बनी रहे।

सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल

घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि यदि सार्वजनिक धन से बनने वाले विकास कार्य कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त हो जाएं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

राजू कुमार गुप्ता का बयान

“मैंने 7 जुलाई 2026 को ही एसडीएम भैयाथान को लिखित आवेदन देकर रपटा की जांच और तत्काल मरम्मत की मांग की थी। आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और आज रपटा बह गया। पूरे मामले की तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

मदनेश्वर साहू का बयान

स्थानीय नेता मदनेश्वर साहू ने कहा कि यदि निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

“यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। सौभाग्य से इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।”

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता की समीक्षा, खर्च की जांच तथा दोषी अधिकारियों, ठेकेदार और संबंधित एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से बनने वाले विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ होने चाहिए।


आधिकारिक पक्ष

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी।


अस्वीकरण: इस समाचार में भाजपा सरकार, प्रशासन, अधिकारियों और निर्माण कार्य को लेकर लगाए गए आरोप संबंधित जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नेताओं एवं ग्रामीणों के बयानों और दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *