सुशासन तिहार का असर: दिव्यांग दिलीप लकड़ा को मिला सम्मान और सहारा

सुशासन तिहार का असर: दिव्यांग दिलीप लकड़ा को मिला सम्मान और सहारा

बैटरी चलित ट्राइसाइकिल से आसान हुई जिंदगी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
मुंगेली, 04 मई 2026 — सुशासन तिहार 2026 का सकारात्मक प्रभाव अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक साफ दिखाई देने लगा है। शासन की संवेदनशील पहल और प्रशासन की सक्रियता ने न केवल समस्याओं का समाधान किया है, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता भी लौटाई है।
इसी क्रम में मुंगेली जिले के सुदूर ग्राम जमुनाही निवासी दिव्यांग दिलीप लकड़ा की कहानी प्रेरणा का उदाहरण बनकर सामने आई है। लंबे समय से शारीरिक अक्षमता के कारण उन्हें रोजमर्रा के कार्यों और आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बैसाखियों के सहारे चलने को मजबूर दिलीप को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी परिवार पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा था।
प्रशासन की तत्परता से बदली तस्वीर
सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में दिलीप लकड़ा ने बैटरी चलित ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने इस आवेदन को प्राथमिकता देते हुए त्वरित कार्रवाई की। जनपद पंचायत और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया।
पात्रता परीक्षण के बाद न केवल उन्हें बैटरी चलित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई, बल्कि पेंशन भी स्वीकृत की गई। इस पहल से दिलीप के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
आत्मनिर्भरता की नई राह
अब दिलीप लकड़ा अपनी दैनिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करने लगे हैं। ट्राइसाइकिल मिलने से उनका आवागमन आसान हो गया है और वे पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ समाज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनके परिवार में भी खुशी का माहौल है और यह पहल शासन की जनहितकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
निष्कर्ष:
सुशासन तिहार जैसी पहलें केवल योजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं। दिलीप लकड़ा की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिली सहायता किसी के जीवन की दिशा बदल सकती है।

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