पथरिया धान मंडी में तौल घोटाला और महिला पत्रकारों से अभद्रता उजागर

पथरिया धान मंडी में तौल घोटाला और महिला पत्रकारों से अभद्रता उजागर

हरिभूमि का हवाला देकर दबंगई, सिस्टम की मिलीभगत पर सवाल
मुंगेली | विशेष रिपोर्ट
मुंगेली जिले की सेवा सरकारी समिति मर्यादित, पथरिया इन दिनों धान खरीदी में भारी अनियमितताओं और दबंगई के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। किसानों के आर्थिक शोषण से लेकर महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार तक, पूरा मामला सहकारी व्यवस्था में गहरे बैठे “सिस्टम के खेल” की ओर इशारा करता है।
धान तौल में खुला खेल, किसानों से जबरन ज्यादा वजन वसूली
धान खरीदी के दौरान समिति द्वारा शासन के स्पष्ट नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि जहां शासन के अनुसार एक बोरी में 40 किलो 600 ग्राम से 40 किलो 700 ग्राम तक धान की तौल निर्धारित है, वहीं समिति प्रबंधन द्वारा 41 किलो 600 ग्राम से लेकर 41 किलो 700 ग्राम तक धान जबरन तौलवाया जा रहा है।
इस अतिरिक्त वजन का सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। पहले से ही महंगाई, खाद-बीज और खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों के लिए यह अवैध वसूली किसी आर्थिक मार से कम नहीं है।
तौल प्रक्रिया पर भी सवाल
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि समिति द्वारा बड़ी मात्रा में धान जमीन पर गिराकर, उसे अलग-अलग बोरियों में भरकर तौला जा रहा है। प्रबंधन का तर्क नमी (सूक्ति) से बचाव बताया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया से धान की गुणवत्ता और तौल की निष्पक्षता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल पूछने पर गोलमोल जवाब, फिर अभद्रता
जब इस पूरे मामले पर समिति के प्रबंधक से सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें कर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका।
आरोप है कि प्रबंधक के बेटे सौरभ शुक्ला ने मौके पर मौजूद महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया। यही नहीं, उसने खुले तौर पर यह तक कह दिया कि
“यहां हरिभूमि पथरिया की धान मंडी को देखता है, और हम हरिभूमि वालों को ही मेंटेन करते हैं।”
यह बयान न सिर्फ पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह कथित संरक्षण के सहारे नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
इस घटना ने सहकारी समितियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। किसानों का शोषण, पत्रकारों को डराने की कोशिश और “मैनेजमेंट” की खुली बात—यह सब दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर सिस्टम किस तरह मनमानी के भरोसे चल रहा है।
कार्रवाई की मांग
किसानों और पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि:
धान तौल की तत्काल निष्पक्ष जांच हो
अतिरिक्त वजन वसूली पर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए
महिला पत्रकारों से अभद्रता करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो
पथरिया समिति की धान खरीदी प्रक्रिया की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *