एसईसीएल प्रभावित क्षेत्रों में मकान मुआवजे की दरें बढ़ाने की मांग

पुरानी और नई दरों में भारी अंतर

छत्तीसगढ़//कोरबा:-
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के गेवरा, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्रों में कोयला खनन विस्तार से प्रभावित हो रहे ग्रामों के निवासियों की अपनी परिसंपत्तियों (मकानों) के मुआवजे के मूल्यांकन में वित्तीय वर्ष 2025-26 की बढ़ी हुई गाइडलाइन दरों को लागू करने की मांग ऊर्जाधानी भू विस्थापित किसान कल्याण समिति ने की है।

समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि छत्तीसगढ़ केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने लगभग 5 साल बाद नई दरें लागू की हैं। चूँकि मकानों और परिसंपत्तियों की मुआवजा गणना मूल्यांकन बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार की जाती है, इसलिए पिछले 5 वर्षों में दिए गए मुआवजे वर्तमान महंगाई के सापेक्ष काफी कम हैं। समिति की ओर से माननीय केंद्रीय कोयला मंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, कोल इंडिया और एसईसीएल प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपकर ध्यान दिलाया गया है कि मूल्यांकन बोर्ड की 2019-20 की दरों से तैयार किए गए मुआवजे को संशोधित किया जाए और वर्तमान नई दरों के अनुसार भुगतान किया जाए।

प्रभावित ग्रामों जैसे नराईबोध, भिलाईबाजार, रलिया, हरदीबाजार, खोडरी, रिसदी, पाली के लिए छत्तीसगढ़ केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा जारी पुरानी और नई दरों में प्रति वर्गफुट (Sq. Ft.) के आधार पर भारी अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे प्रभावित परिवारों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

प्रभावित परिवारों का पक्ष

प्रभावितों का कहना है कि जब तक मुआवजा 2025-26 की नई दरों पर नहीं दिया जाता, तब तक उचित और न्यायसंगत पुनर्वास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज की महंगाई और निर्माण लागत के हिसाब से पुरानी दरों पर मिलने वाला मुआवजा केवल एक मज़ाक है।
“हम अपनी पैतृक ज़मीन और घर छोड़ रहे हैं, हमें कम से कम वर्तमान मूल्य पर मुआवजा मिलना चाहिए ताकि हम सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।”

यह भी उल्लेख किया गया है कि गेवरा, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्र एसईसीएल के लिए महत्वपूर्ण कोयला उत्पादन क्षेत्र हैं, और खनन कार्यों में स्थानीय समुदाय का सहयोग आवश्यक है। इसलिए, प्रबंधन को तत्काल नई दरें लागू कर विसंगतियों को दूर करना चाहिए।

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