पेट्रोल पम्प में युवती की नृशंस हत्या – कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

पेट्रोल पम्प में युवती की नृशंस हत्या – कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

अंबिकापुर।
सूरजपुर का दोहरा हत्याकांड, बलरामपुर कस्टोडियल डेथ, रायपुर में लगातार बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएँ, पैर पसारते आर्थिक अपराधियों का साम्राज्य, बदहाल सड़कें और ध्वस्त प्रशासनिक व्यवस्था… इन सबके बीच पेट्रोल पंप में कार्यरत एक युवती की दिन-दहाड़े दौड़ाकर चाकू मारकर हत्या ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

वर्तमान भाजपा सरकार को लेकर जनता में आक्रोश है और यह कहा जाने लगा है कि सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है।

यह लेख असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी के फेसबुक वाल से लिया गया है। अंसारी राजनीति, अपराध, विधि और समाज से जुड़े विषयों पर शोधात्मक लेख और वीडियो बनाकर लगातार जनजागरण करते रहे हैं।

भाजपा सरकार पर निशाना

अंसारी का कहना है कि जब से भाजपा की सरकार आई है और विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री बने हैं, तब से कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ती गई है।
उन्होंने कहा— “अगर भाजपा की आलोचना करते हैं तो कांग्रेस की याद आती है। तब हमारे सरगुजा ने कांग्रेस को 14 सीटें दी थीं, फिर 2023 में भाजपा को। पिछली कांग्रेस सरकार के शुरुआती दो वर्ष ठीक-ठाक चले, लेकिन ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनने की लड़ाई ने सरगुजा को गर्त में ढकेल दिया। इस संभाग को पिछली सरकार से एक ढेला नहीं मिला। नतीजा—जनता ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर भाजपा की सरकार बनाई। बदले में भाजपा ने सरगुजा संभाग से एक कैबिनेट मंत्री और यहीं से मुख्यमंत्री दिया, लेकिन परिणाम शून्य रहा।”

‘सीएम सिर्फ नाम के, असल में अफसरों का राज’

अंसारी ने आगे कहा कि जिस तरह अमित शाह गुजरात को चरण पादुका से चलाते हैं, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ को प्रशासनिक अधिकारी चला रहे हैं। विष्णुदेव साय कहने को मुख्यमंत्री हैं, लेकिन असल शक्ति ओ.पी. चौधरी और राज्य गृह मंत्री विजय शर्मा में बँटी हुई है।

कांग्रेस सरकार से तुलना

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर बोलते हुए अंसारी ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार की आलोचना करने की वजह से उन्हें और उनके पत्रकार साथियों को भारी परेशानियाँ झेलनी पड़ीं—11 फर्जी FIR, तड़ीपारी और खुद को हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा।
फिर भी उस सरकार में एक बात थी—

बड़े अपराधियों पर कार्रवाई होती थी।

भू-माफिया जेल जाते थे।

जनता की चिट्ठियों का जवाब आता था।

विवादित कलेक्टर और एसपी का रातों-रात ट्रांसफर हो जाता था।

‘वर्तमान सरकार में नेतृत्व का अभाव’

अंसारी का सवाल है कि वर्तमान भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री सहित किसी मंत्री में क्या ऐसा नेतृत्व दिखता है, जिससे जनता प्रभावित हो?
उनके अनुसार—

प्रशासनिक भर्राशाही

भ्रष्टाचार

लालफीताशाही
सरगुजा में चरम पर है।

मीडिया पर भी निशाना

उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए—
“प्रदेश से लेकर देश तक किसी भी स्थापित मीडिया में सत्ता पक्ष की तीखी आलोचना आपने पढ़ी या सुनी? प्रसिद्ध अखबारों या चैनलों में पुलिस विभाग के विषय में आलोचना देखी-सुनी हो तो मेरी जानकारी बढ़ाइए।”

अंसारी के मुख्य बिंदु

 सरकार फेल

 जनप्रतिनिधि कमजोर

 प्रशासनिक मनमानी

 मीडिया सत्ता की चाटुकारिता

 रसूख़दारों के खिलाफ खबर दबाने की पहचान

युवाओं का मुद्दा?

व्यंग्य करते हुए अंसारी ने लिखा कि युवाओं का मुख्य मुद्दा अब यही रह गया है—
“एल्विश यादव का शो होगा कि नहीं?”

निष्कर्ष

अंसारी ने अंत में लिखा—
“वर्तमान सरकार अभी से ही बर्दाश्त से बाहर है। और अगर अगले चुनाव में कांग्रेस की सोचें तो टी.एस. सिंहदेव के ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनने की ज़िद्द याद आती है। आखिर हम करें तो करें क्या? जाएँ तो जाएँ कहाँ?”

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *